नाना पाटेकर ने महाराष्ट्र के कई गांवों में जल संकट के कारण पड़ताल की। उन्होंने किसानों के सुसाइड के मामलों को ध्यान में रखते हुए अपनी 'NAAM' फाउंडेशन का उपयोग करके उनकी मदद के लिए काम किए। उन्होंने जल संकट के कारण पीड़ित किसानों के साथ बातचीत की और उनकी आवश्यकताओं को समझने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने अपनी फाउंडेशन के माध्यम से जल आपूर्ति के लिए विभिन्न गांवों में दान दिया।
नाना पाटेकर के इस कार्य के पीछे एक बड़ा बदलाव छिपा है। उन्होंने अपनी आवासीय जीवनशैली के बजाय अपनी निजी फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। इस तरह उन्होंने अपने नाम के साथ एक नए रूप को जुड़ा। इस बारे में उनके बयान में कहा गया है कि आपके जीवन में आपके नाम के साथ एक नए रूप को जुड़ा रहता है।






























